अमृतसर : एक तरफ जहां लोहड़ी व माघी के त्यौहार पर चारों तरफ खूनी डोर उड़ी तो वहीं बसन्त पंचमी पर भी चारों तरफ यही खूनी डोर उड़ती नजर आई। दूसरी तरफ प्रशासन की बनाई टीमें लोहड़ी के बाद पतंग विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर यह कहती नजर आई कि अपनी दुकानों पर चाइना डोर पर प्रतिबंध के पोस्टर लगाएं।
इतना भी नहीं पता कि चाइना डोर पतंग विक्रेताओं की दुकानों पर नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोग चोरी छिपे चाइना डोर बेचते हैं, जिनका पतंग व डोर के कारोबार से दूर का भी नाता नहीं है। इन लोगों में मुनियारी का काम करने वाले कुछ लोग, आम पापड़ बेचने वाले कुछ लोग, हलवाई व करियाना आदि का काम करने वाले कुछ लोग शामिल हैं, जो अपने जरा से मुनाफे के लिए लोगों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं व मनुष्य से लेकर पशु-पक्षी इस खूनी डोर की चपेट में आकर तड़प-तड़पकर मरते हैं या फिर बुरी तरह से घायल होते हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि चाइना डोर के मामले में 15 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान होने के बावजूद अमृतसर जिले में पी.सी.बी. व अन्य विभागों की तरफ से एक भी केस नहीं बनाया गया है। पुलिस की तरफ से कुछ केस जरूर बनाए गए हैं, लेकिन उनमें मौके पर ही जमानत मिल जाती है।


