पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए डोनी बल और प्रभ दासूवाल गैंग के कथित प्रमुख सरगना गुरविंदर उर्फ अफरीदी को इथियोपिया से डिपोर्ट कर भारत वापस लाया है। इस कार्रवाई को पंजाब पुलिस ने काउंटर इंटेलिजेंस की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल (OFTEC) और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से अंजाम दिया।
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, आरोपी ने विदेश भागने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था। उसने उत्तर प्रदेश के पासपोर्ट कार्यालय से गोरखपुर के एक फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाया था। इसके अलावा, उसने मैक्सिको का पासपोर्ट हासिल करने और खुद को वहां का नागरिक साबित करने की भी कोशिश की थी। पुलिस के मुताबिक, किसी अफ्रीकी देश से इस तरह की डिपोर्टेशन कार्रवाई के तहत आरोपी को पहली बार भारत लाया गया है।
10 महीने तक चला अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन शहीद’ के तहत करीब 10 महीने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया। आरोप है कि विदेश में रहकर वह पंजाब में टारगेट किलिंग, फिरौती के लिए फायरिंग और अन्य संगठित आपराधिक गतिविधियों को निर्देशित कर रहा था।
आरोपी की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए पंजाब सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। पुलिस के अनुसार, गुरविंदर उर्फ अफरीदी करीब 30 आपराधिक मामलों में वांछित था।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश फरार हुआ था आरोपी
डीजीपी गौरव यादव के मुताबिक, आरोपी ने 12 फरवरी 2025 को विजेंद्र सिंह के नाम से गोरखपुर के पते पर उत्तर प्रदेश पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट बनवाया था। इसी फर्जी पासपोर्ट के आधार पर वह 31 मार्च 2025 को भारत से विदेश फरार हो गया।
उसकी विदेश यात्रा और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के साथ साझा किया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया गया। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ कुल सात इंटरपोल नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है।
भारत से फरार होने के बाद आरोपी पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा। इसके बाद उसकी गतिविधियां इस्तांबुल और मैक्सिको में भी सामने आईं। उसने मैक्सिको का पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश भी की।
अप्रैल 2026 में आरोपी केन्या पहुंचा और जून 2026 में वहां से अंगोला चला गया। इसके बाद वह इथियोपिया पहुंचा, जहां से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के समन्वय से उसे डिपोर्ट कर भारत लाया गया।
एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में चला तलाशी अभियान
पंजाब पुलिस के अनुसार, आरोपी की तलाश के लिए एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में खुफिया नेटवर्क सक्रिय किया गया था। उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई और तकनीकी माध्यमों से लोकेशन ट्रैक की गई।
इस पूरे अभियान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ-साथ विदेश मंत्रालय और केंद्रीय जांच एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया। करीब 10 महीने तक चले इस समन्वित अभियान के बाद पुलिस को आरोपी को भारत वापस लाने में सफलता मिली।


