पंजाब विधानसभा चुनाव से करीब सात महीने पहले कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
हाल ही में चरणजीत चन्नी और उनके बेटे रिदमजीत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक रील साझा की, जिसमें संदेश था कि “कुछ लोग यह समझ रहे हैं कि हम जवाब नहीं देंगे, लेकिन सही समय आने पर हर बात का हिसाब दिया जाएगा।” इस पोस्ट को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया।
रील पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा वड़िंग ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर रील या पोस्ट डालने से चुनाव नहीं जीते जाते। उन्होंने कहा कि जनता नेता के काम के आधार पर फैसला करती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया की लोकप्रियता ही जीत का पैमाना होती, तो सिद्धू मूसेवाला चुनाव नहीं हारते।
इसी बीच, पंजाब कांग्रेस ने सनौर के पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर को पार्टी विरोधी बयानबाजी के आरोप में निष्कासित कर दिया। हालांकि, चरणजीत चन्नी उनके घर पहुंचे और कहा कि यह समय नेताओं को जोड़ने का है, न कि आपसी मतभेद बढ़ाने का। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की असली लड़ाई विपक्षी दलों से है।
राजा वड़िंग ने 2022 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस चुनाव में मालवा क्षेत्र से कई बड़े नेता हार गए थे और कांग्रेस को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद वह विदेश नहीं गए, बल्कि लगातार पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे।


