शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने नवंबर 1984 में दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख नरसंहार को भारतीय लोकतंत्र के माथे पर कलंक करार दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि घटना के चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ की बाट जोह रहे हैं।
1984 के नरसंहार में मारे गए सिखों को श्रद्धांजलि देते हुए एडवोकेट धामी ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार की शह पर 1 नवंबर से करीब एक सप्ताह तक सिख समुदाय को निशाना बनाकर हिंसा की गई। इस दौरान हजारों निर्दोष लोगों की हत्या की गई और मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं हुईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दोषियों को सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय आरोपों का सामना करने वाले नेताओं का बचाव किया और उन्हें बड़े राजनीतिक पदों से सम्मानित किया। इस घटना ने पूरी दुनिया के संवेदनशील लोगों को झकझोर कर रख दिया था।
पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए उठाए जाएं ठोस कदम
SGPC अध्यक्ष ने कहा कि देश की आजादी में सिख समुदाय का योगदान और उसकी कुर्बानियां किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद सिखों को बार-बार अन्याय का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि नवंबर का महीना आते ही 1984 के नरसंहार में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के पुराने जख्म फिर से हरे हो जाते हैं। सरकारों की जिम्मेदारी है कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाए और इस हत्याकांड के दोषियों को कानून के मुताबिक सजा सुनिश्चित की जाए।
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एडवोकेट धामी ने कहा कि सिख कौम इस दर्दनाक त्रासदी को कभी नहीं भुला सकती। नरसंहार में जान गंवाने वाले लोगों की याद में हर साल श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।


