22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के नागरिकों के लिए वीजा और बॉर्डर से जुड़े नियम सख्त कर दिए थे। इसका असर उन करीब 150 पाकिस्तानी सिंधी महिलाओं पर भी पड़ा, जिनकी भारत में रहने वाले पुरुषों से सगाई हो चुकी थी और वे शादी के लिए भारत आने का इंतजार कर रही थीं।
लंबी कोशिशों के बाद केंद्र सरकार ने इन महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को भारत आने की अनुमति दी। इसके बाद पाकिस्तान से दुल्हनें और उनके परिवार के लोग मस्कट, दुबई, श्रीलंका और अन्य देशों के रास्ते हवाई यात्रा कर भारत पहुंचे।
नागपुर के नेता राजेश झांबिया ने रविवार को बताया कि इन महिलाओं का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है।
झांबिया पाकिस्तान से आए सिंधी प्रवासियों के मामलों में काम करते हैं। उन्होंने PTI को बताया कि पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत से शादी के लिए आने वाली महिलाएं आमतौर पर वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आती थीं।
लेकिन पहलगाम हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात बदल गए। सरकार ने अटारी मार्ग से भारत आने की योजना बना रहे लोगों के कई वीजा आवेदन खारिज कर दिए।
पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी।
शादानी दरबार ने तैयार की 150 दुल्हनों की सूची
झांबिया के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने रायपुर के संत युधिष्ठिरलाल शादानी से संपर्क किया। शादानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल शादानी दरबार के प्रमुख हैं।
शादानी दरबार ने भारत में रहने वाले पुरुषों से सगाई कर चुकी पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार करनी शुरू की। इस सूची में करीब 150 दुल्हनें शामिल थीं। इनकी शादी नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और भारत के दूसरे शहरों में होनी थी।
यह सूची गृह मंत्रालय को भेजी गई और दुल्हनों के साथ उनके परिवारों को भी भारत आने का वीजा देने की अपील की गई।
झांबिया के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने इन लोगों को भारत आने की अनुमति इस शर्त पर दी कि वे अटारी बॉर्डर के बजाय हवाई मार्ग से भारत आएंगे।


