Wednesday, October 28, 2026
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मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा द्वारा नदी जल पर बी.बी.एम.बी. के किसी भी आदेश को न मानने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित

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पंजाब के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव पारित किया-भगवंत सिंह मान
चंडीगढ़, 5 मईमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि पंजाब नदी जल के बंटवारे के बारे में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) के किसी भी फैसले को नहीं मानेगा।

जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बी.बी.एम.बी. का गठन वास्तव में सतलुज और ब्यास के पानी के प्रबंधन के लिए हुआ था। ये दोनों नदियाँ पंजाब में बहती हैं जिसके कारण इन पानी पर पूरी तरह पंजाब का हक है। हरियाणा या राजस्थान का इन नदियों से कोई लेना-देना नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बी.बी.एम.बी. के जरिए कई सालों से पंजाब का पानी दूसरे राज्यों को बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार ने इस बोर्ड को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब से पूछे बिना आधी रात को बैठकें बुलाकर और दूसरे राज्यों के दबाव में आकर पंजाब का हक छीना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी अपनी हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार और बी.बी.एम.बी. के माध्यम से पंजाब के अधिकारों पर डाका मारने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि गैर-संवैधानिक और गैर-कानूनी ढंग से बी.बी.एम.बी. की बैठक बुलाकर पंजाब का पानी जबरदस्ती हरियाणा को देने की कोशिश की जा रही है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हरियाणा 31 मार्च तक अपने हिस्से के पानी का उपयोग कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भाजपा सरकार चाहती है कि पंजाब के हक का पानी हरियाणा को दिया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले 3 सालों में भगवंत मान सरकार ने पंजाब के हर खेत को नहर का पानी पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि नहरों और खालों का नेटवर्क बहुत बड़े स्तर पर कायम किया गया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि साल 2021 तक पंजाब के सिर्फ 22 फीसदी खेतों तक नहर का पानी पहुंचता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पंजाब के लगभग 60 फीसदी खेतों तक नहर का पानी पहुंच रहा है, इसीलिए अब पंजाब के पानी की एक-एक बूंद पंजाब के लिए बहुत कीमती हो गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास अब अपने हिस्से का पानी किसी और राज्य को देने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली 6 अप्रैल को हरियाणा ने पंजाब से अनुरोध किया था कि उसे पीने के लिए पानी की जरूरत है। भगवंत सिंह मान ने पंजाब ने बड़ा दिल दिखाते हुए अपने हिस्से में से हरियाणा को 4000 क्यूसेक पानी दे दिया; क्योंकि हमारे महान गुरु साहिबान ने हमें सिखाया है कि किसी भी प्यासे को पानी देना बहुत बड़े पुण्य का काम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की आबादी 3 करोड़ है और 3 करोड़ लोगों को पीने के लिए और सभी मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सिर्फ 1700 क्यूसेक पानी की जरूरत है, लेकिन हरियाणा ने हमसे 4000 क्यूसेक की मांग की और हमने मानवता के नाते उन्हें दे दिया। उन्होंने कहा कि अब हरियाणा कह रहा है कि उसे 8500 क्यूसेक पानी चाहिए। पंजाब के पास इस मांग को पूरा करने के लिए और अतिरिक्त पानी नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने जबरदस्ती गैर-संवैधानिक और गैर-कानूनी ढंग से बी.बी.एम.बी. की बैठक बुलाई और एक प्रस्ताव पारित किया कि पंजाब को अपने हिस्से के पानी में से हरियाणा को पानी देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सदन की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि स्पष्ट तौर पर दृढ़ता से यह ऐलान करता है कि पंजाब सरकार अपने हिस्से में से हरियाणा को एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं देगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ पीने के लिए जो पानी दिया जा रहा है, वही दिया जाएगा, इसके अलावा अतिरिक्त पानी की एक बूंद भी नहीं दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सदन भारतीय जनता पार्टी द्वारा गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक तरीके से बी.बी.एम.बी. की बैठक बुलाए जाने की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि पंजाब अब भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड को नहीं मानेगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब अब बी.बी.एम.बी. के पानी से जुड़े किसी भी फैसले को नहीं मानेगा और सतलुज और ब्यास नदियों का पानी सिर्फ और सिर्फ पंजाब का है और हम अब इस पानी का पूरा उपयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार अपने बनते हिस्से के पानी की रक्षा के लिए हर कानूनी और संवैधानिक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सदन यह प्रस्ताव पंजाब के हक, पंजाब की मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह प्रस्ताव हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित क्रांति राज्य के लिए बहुत महंगी साबित हुई है क्योंकि भूजल का अधिक उपयोग किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने खालों और कस्सियों को बहाल किया जिससे राज्य में टेलों पर पानी पहुंच रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार अपने पानी का 80 फीसदी नहर का पानी उपयोग कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले गांवों के माध्यम से नहरें तो गुजरती थीं लेकिन कभी इन गांवों को पानी नहीं मिला लेकिन उनकी सरकार राज्य के हर हिस्से में पानी की पहुंच को सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इन मसलों की कभी परवाह नहीं की क्योंकि आम आदमी और राज्य के प्रति उनका रवैया नकारात्मक था।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि बड़े महलों और घरों में रहने वाले नेताओं को आम लोगों के मसलों से कोई सरोकार नहीं था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पानी की स्थिति बहुत नाजुक है और बीते साल के मुकाबले इस साल बांधों में 55 फीट पानी कम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने मार्च में ही अपने हिस्से का पानी उपयोग कर लिया था जिसके बाद पंजाब ने हरियाणा को छह पत्र लिखकर पहले ही सचेत कर दिया था। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हरियाणा को मानवता के आधार पर 4000 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस, अकाली और भाजपा के हाथ पंजाबियों के खून से रंगे हुए हैं क्योंकि इन पार्टियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए पानी के हक को दरकिनार करके पंजाब से गद्दारी की। हर 25 साल बाद पानी का मूल्यांकन करने की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यमुना सतलुज लिंक नहर (वाई.एस.एल.) की जरूरत है क्योंकि हरियाणा के पानी में पंजाब का भी हिस्सा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्हें पंजाब के हित सबसे अधिक प्यारे हैं और इसकी खातिर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि भगवा पार्टी राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए घटिया राजनीति कर रही है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि भाजपा की पंजाब विरोधी मानसिकता है और अगर उनका वश चले तो वे राष्ट्रीय गीत में से पंजाब शब्द ही हटा देंगे।
डैम सेफ्टी एक्ट को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य और इसके अधिकारों पर सीधा हमला है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने सांसद के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब, देश में बांधों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है और हमें अपने बांधों की रक्षा के लिए किसी और की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सर्वदलीय बैठक में शामिल होने वाले सभी नेताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण मामला था और वैचारिक मतभेदों के बावजूद सभी पार्टियों के नेताओं ने राज्य के अधिकारों की इस लड़ाई में उनका समर्थन किया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी राजनीतिक नेता एक मंच पर इकट्ठे हुए और देश को सख्त और एकजुट संदेश दिया, जो आज समय की जरूरत थी।

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