ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कहते थे कि इसे हर हाल में हासिल करेंगे, वेनेजुएला जैसे मिलिट्री एक्शन लेंगे, शांति के बारे में नहीं सोचेंगे। लेकिन रातोंरात ट्रम्प का रुख बदल गया है।
21 जनवरी को दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने ऐलान किया कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करेंगे, लेकिन ताकत से नहीं। ट्रम्प के 75 मिनट के भाषण के बाद माना जा रहा है कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए मिलिट्री एक्शन या ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा।
- ट्रम्प के भाषण से एक दिन पहले दावोस में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने कहा, ‘अमेरिका का वर्चस्व था, लेकिन अब यह व्यवस्था नहीं टिकने वाली। अमेरिका की गुटबंदी से बाकी देश और ज्यादा गरीब और कमजोर हो जाएंगे। कम ताकतवर देशों को अपने जैसी सोच वाले पार्टनर्स के साथ गठबंधन बनाना चाहिए।’
- ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दुनिया के 80 देशों में 750 से ज्यादा मिलिट्री बेस रखने वाले अमेरिका को अपना दबदबा कम होने का खतरा है। अमेरिका को लगता है कि रूस या चीन उसकी जगह ले सकते हैं।
- दरअसल, चीन और रूस को अपनी ग्लोबल पोजिशन मजबूत करने का मौका मिल रहा है। ये देश नए अलायंस और अन्य ग्लोबल ऑर्डर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया एक ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रही है, जहां अमेरिका का ग्लोबल ऑर्डर न हो और देश अपना हित देख सकें।
- हाल ही में आई पेंटागन की रिपोर्ट में चीन और अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी-2025 में रूस को खतरा बताते हुए उन पर नजर रखने की बात कही गई है।


