Thursday, July 16, 2026
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पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 914 मरीज़ों को ₹4.15 करोड़ का कैशलेस स्ट्रोक उपचार प्रदान किया गया

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  • *पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 914 मरीज़ों को ₹4.15 करोड़ का कैशलेस स्ट्रोक उपचार प्रदान किया गया*
  • *किसी भी परिवार को आर्थिक चिंता के कारण स्ट्रोक के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए; जीवन बचाने के लिए हर मिनट महत्त्वपूर्ण है : डॉ. बलबीर सिंह*
  • *समय पर जाँच , आधुनिक इमेजिंग और समय पर उपचार से स्ट्रोक के मरीज़ों की रिकवरी में बड़ा बदलाव संभव : डॉ. हरमन सोबती, सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन, मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना*

चंडीगढ़, 15 जुलाई 2026: स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता। एक पल पहले व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है। पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग , इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों में मरीज़ों की सहायता कर रही है।

स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है। ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसकी प्रमुख ज़ोखिम कारकों में शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे ज़ोखिम कारकों से जुड़ी है जिन्हें रोका जा सकता है। वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का भी कहना है कि समय पर उपचार से मरीज़ की रिकवरी बेहतर हो सकती है, जबकि ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़े ज़ोखिमों पर बेहतर नियंत्रण से स्ट्रोक की संभावना को कम किया जा सकता है।

स्ट्रोक का इलाज काफी महँगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीज़ों का ₹4.15 करोड़ की लागत से उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए, जिन पर ₹14.27 लाख का सबसे अधिक ख़र्च आया।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीज़ों का इलाज हुआ, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले अपेक्षाकृत कम थे, लेकिन प्रति मरीज़ उपचार लागत अधिक रही। कुल ख़र्च का बड़ा हिस्सा सीटी/एमआरआई जाँच तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं वाले मामलों पर हुआ।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज़ों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले। स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्त्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता इलाज में होने वाली देरी और जीवन बचाने के बीच का अंतर साबित हो सकती है।”

सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तथा मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा, “स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें समय पर जाँच और उपचार मरीज़ के भविष्य का फैसला कर सकते हैं। आधुनिक इमेजिंग, गहन निगरानी और समय पर इलाज से उपचार के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।” उन्होंने कहा कि जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। डॉ. सोबती ने आगे कहा, “लोगों को अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी, चेहरे का एक ओर झुक जाना, बोलने में कठिनाई जैसे चेतावनी संकेतों को पहचानकर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”

डॉ. हरमन सोबती के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और सीटी स्कैन तथा एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा, “जटिल स्ट्रोक के मामलों में परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सेहत योजना एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करती है।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, डायबिटीज मैनेजमेंट तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक के ज़ोख़िम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्ट्रोक के आंकड़ों से सामने आई अहम बातें-

स्ट्रोक तेज़ी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है, जिसके लिए तुरंत आपातकालीन उपचार की आवश्यकता है।

* उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

* सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का प्रमुख आधार बन रही हैं।

* जटिल स्ट्रोक के मामलों से परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

* स्वास्थ्य योजनाएँ अचानक आने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों में परिवारों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर सकती हैं।

* ब्लड प्रेशर नियंत्रण, डायबिटीज का उचित प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना स्ट्रोक से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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