लुधियाना: पंजाब में अप्रैल के महीने में ही सूर्य देवता के कड़े तेवरों ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। आसमान से बरसती आग और भीषण हीट वेव (लू) के प्रकोप का सबसे घातक असर स्कूली विद्यार्थियों, विशेषकर सरकारी स्कूलों के बच्चों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए शिक्षा विभाग के डायरैक्टर जनरल स्कूल शिक्षा (डी.जी.एस.ई.) द्वारा सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।
विभाग ने नैशनल डिजास्टर मैनेजमैंट अथॉरिटी (एन.डी.एम.ए.) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए सभी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे विद्यार्थियों को सुबह की सभा और क्लासरूम में लू से बचाव के प्रति जागरूक करें। लेकिन धरातल पर सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बढ़ती गर्मी और बच्चों की गिरती सेहत को देखते हुए अभिभावकों और अध्यापक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों का समय तुरंत बदला जाए। अभिभावकों की स्पष्ट मांग है कि स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7 से 11 बजे तक किया जाए। उनका तर्क है कि 11 बजे के बाद धूप असहनीय हो जाती है, जिससे बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता और वे बीमार पड़ने लगते हैं।
बिजली कटों ने निकाली बच्चों की जान, सुविधाओं का भारी अभाव
शहर और ग्रामीण इलाकों में लग रहे लंबे-लंबे बिजली के कटों ने क्लासरूम को भट्टी बना दिया है। यहां निजी और सरकारी स्कूलों के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। निजी स्कूलों में जैनरेटर और भारी-भरकम इन्वर्टर की सुविधा होने के कारण बच्चों को कुछ राहत मिल जाती है लेकिन अधिकतर सरकारी स्कूलों में जैनरेटर न होने के कारण बच्चे उमस और पसीने में तपने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर समस्या पानी की है। बिजली गुल होते ही स्कूलों की मोटरें बंद हो जाती हैं जिससे वाटर कूलर महज दिखावा बन जाते हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।


