Saturday, June 13, 2026
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दिल्ली में पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के बिना पेट्रोल बंद:सिर्फ BS-6 इंजन वाली गाड़ियों को एंट्री, 12 लाख वाहन प्रभावित होंगे; दफ्तरों में 50% WFH अनिवार्य

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दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए गुरुवार से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा फेज लागू हो गया है। इसके तहत दिल्ली में सिर्फ BS-6 इंजन वाली गाड़ियों को एंट्री मिलेगी। इससे कम मानक वाले दूसरे राज्यों के निजी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।

इस फैसले से गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और नोएडा से दिल्ली में रोजाना आने-जाने वाली 12 लाख गाड़ियो पर असर पड़ने की आशंका है। आज से नोएडा से 4 लाख से ज्यादा , गुरुग्राम से 2 लाख और गाजियाबाद से 5.5 लाख वाहनों को दिल्ली में आने से रोक दिया जाएगा।

दिल्ली में ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू हो गया है। इसके तहत, पॉल्युशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के बिना गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं मिलेगा। बिना PUC सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं।

सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया गया है। प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज चलेंगी। सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी के स्टूडेंट्स को अपनी मर्जी से ऑनलाइन या फिजिकल क्लास चुनने का ऑप्शन दिया गया है।

दिल्ली में GRAP-4 के तहत निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों पर पूरी तरह बैन है।​ CNG, इलेक्ट्रिक वाहन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और जरूरी सेवाओं को छूट दी गई है। ट्रैफिक जाम रोकने के लिए 100 हॉटस्पॉट्स पर गूगल मैप मदद लेगा। नियम तोड़ने पर वाहन जब्ती, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी। पर्यावरण अधिनियम 1986 के तहत सजा मिलेगी।​ इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को प्रदूषण पर सख्ती दिखाई। कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को दिल्ली की सीमाओं पर बने 9 टोल प्लाजा अस्थायी रूप से बंद या हटाने को कहा है, ताकि जाम न लगे।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने नए नियम और प्रोटोकॉल के बजाय मौजूदा उपायों के प्रभावी अमल पर जोर दिया। बेंच ने कहा कि सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं है। जरूरी है कि सरकार प्रैक्टिकल और असरदार समाधान अपनाए और मौजूदा उपायों को सही तरीके से लागू किया जाए।

कोर्ट ने उन पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति दी, जो बीएस-4 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप नहीं। कोर्ट ने अपना 12 अगस्त का आदेश बदला है। उसमें 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई से रोका गया था।

 

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