गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को सही ठहराया।
जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने कहा कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) से जुड़े दोषियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि 56 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा 30 मार्च 2027 तक दिया जाए।
वर्ष 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों और सूरत में मिले बमों के मामलों को जोड़कर एक बड़ा मुकदमा बनाया गया था। 2009 में शुरू हुए इस मामले की सुनवाई करीब 12 वर्षों तक चली। मुकदमे के दौरान 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 6,000 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए गए और लाखों पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई।


