आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को 23 और लोगों को आधिकारिक तौर पर आतंकी घोषित किया है। सरकार के अनुसार, ये सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) से जुड़े हुए हैं।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, ये लोग आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ कराने, आतंकी हमलों की साजिश रचने, आतंक के लिए धन जुटाने, हथियार और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
नई सूची में शामिल 23 लोगों में से 6 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जबकि 17 पाकिस्तान से जुड़े हैं। इनमें 7 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और 10 पाकिस्तान में रह रहे हैं।
इन 23 नामों के शामिल होने के बाद भारत सरकार की ओर से घोषित आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
सरकार की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुछ आतंकियों का नाम वर्ष 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और वर्ष 2022 के सुनजवां आतंकी हमले से भी जोड़ा गया है।
29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा स्थित सेना के कैंप पर सेना की वर्दी पहनकर आए तीन आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में सात जवान शहीद हुए थे, जबकि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया था। जांच एजेंसियों ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद की साजिश बताई थी।
वहीं, 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां इलाके में CISF के जवानों को ले जा रही बस पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में एक जवान शहीद हुआ था और कई अन्य घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। बाद की जांच में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी।


