लुधियाना: पंजाब में ‘आप’ सरकार द्वारा अब तक माइनिंग पॉलिसी न बनाए जाने के कारण राज्य भर के लगभग आधे ईंट भट्ठे बंद पड़े हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो इससे भट्ठों पर काम कर रहे करीब 5 लाख मजदूरों और उनके लगभग 25–30 लाख पारिवारिक सदस्यों के बेरोजगार होने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, पंजाब में रोजाना बड़ी संख्या में कांडला पोर्ट से पहुंच रही कोयले की बड़ी खेप में मिक्सिंग का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कोयले में मिक्सिंग और सरकार की नालायकी के कारण पंजाब का भट्ठा उद्योग तबाही की कगार पर पहुंच चुका है। नतीजा पंजाब के सिर पर बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगा है। उक्त आरोप पंजाब वैल्फेयर भट्ठा एसोसिएशन द्वारा एक विशेष प्रैस वार्ता के दौरान लगाए गए हैं।
प्रधान इंद्रपाल सिंह वालिया की अगुवाई में आयोजित प्रैस वार्ता के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे भट्ठा मालिकों केवल कृष्ण गोयल चेयरमैन जिला संगरूर, पवन बांसल प्रधान पटियाला, सुरेंद्र टांगड़ी, सुरेंद्र लेखी, दुनी चंद मित्तल, सुरेंद्र कुमार लीला संगरूर, दविंदर सिंह वालिया, हरिंदर सिंह सिद्धू, योगेश अग्रवाल और वरिंदर गोयल ने कहा कि राज्य में कोई माइनिंग पॉलिसी नहीं होने के कारण पंजाब का भट्टा उद्योग पहले से ही वैंटीलेटर पर है, 2800 में से 1400 अर्थात आधे भट्ठे बंद पड़े हैं। अगर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समय रहते भट्ठा उद्योग को बचाने का प्रयास नहीं किया गया इससे न केवल भट्ठों पर काम कर रहे 5 लाख के करीब मजदूर और उनके 25 से 30 लाख पारिवारिक सदस्य बेरोजगार हो जाएंगे बल्कि पंजाब का भट्ठा उद्योग इतिहास के पन्नों में दफन होकर रह जाएगा, जिसकी सीधे जिम्मेदार केंद्र और पंजाब सरकार होगी।


