इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण की सदस्य सचिव श्रीमती जगदीप कौर विर्क ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विवादों का शीघ्र, कम खर्च में और सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा करना है, ताकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के अनुरूप न्याय तक लोगों की पहुंच को बढ़ाया जा सके।
लोक अदालत में वादकारी, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा अन्य सहयोगी भागीदार शामिल हुए। इस दौरान दीवानी, वैवाहिक, संपत्ति, मोटर दुर्घटना दावों, बैंकिंग, बीमा तथा अन्य मामलों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सहमति के माध्यम से निपटारा किया गया। लोक अदालत ने जहां वादकारियों को राहत प्रदान की, वहीं अदालतों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान राज्य के सभी जिलों और उप-मंडलों में कुल 404 लोक अदालत पीठों का गठन किया गया। इन पीठों के समक्ष कुल 6,54,612 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से 5,99,283 मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹1,116,10,96,635 की राशि के अवार्ड पारित किए गए।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबे समय से लंबित अनेक मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया, जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम हुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत में विशेष रूप से पारिवारिक विवादों का भी आपसी सहमति से समाधान किया गया।
इस अवसर पर पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी चेयरमैन माननीय न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल ने राज्यभर के न्यायिक अधिकारियों, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों तथा स्वयंसेवकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सभी की सामूहिक प्रतिबद्धता के कारण यह मेगा कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हो सका।
पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, सभी जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों, राज्य न्यायपालिका, बार के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों तथा सिविल प्रशासन का उनके सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।


