चंडीगढ़ में अब लोग अपनी पसंद के डिजाइन की कोठी बनाने के लिए रिहायशी प्लॉट नहीं खरीद सकेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में प्लॉटेड डेवलपमेंट को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब नए व्यक्तिगत प्लॉट बेचने की बजाय केवल ग्रुप हाउसिंग और मल्टीस्टोरी फ्लैट्स को मंजूरी दी जाएगी।
इस प्रस्ताव को प्रशासन के संशोधित मास्टर प्लान में शामिल किया गया है। इसके तहत शहर की हॉरिजॉन्टल ग्रोथ की बजाय अब वर्टिकल ग्रोथ पर जोर दिया जाएगा। फेज-II के सेक्टरों में मौजूद खाली प्लॉट क्लस्टरों को भी अब व्यक्तिगत मकानों की बजाय ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए दोबारा प्लान किया जाएगा।
हालांकि सेक्टर-1 से सेक्टर-30 तक के इलाके में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र हेरिटेज जोन में शामिल है। इसके अलावा प्रशासन मिक्स्ड लैंड यूज एरिया बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। शहर में पार्किंग की बढ़ती समस्या को देखते हुए नई योजनाओं में पार्किंग सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संशोधित योजना के अनुसार शहर का मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्र 252 एकड़ से बढ़ाकर 428 एकड़ किया जाएगा। यानी अब व्यावसायिक और रिहायशी गतिविधियों को मिलाकर अधिक व्यवस्थित विकास की तैयारी है।
चंडीगढ़ प्रशासन का कहना है कि शहर अब लगभग पूरी तरह विकसित हो चुका है और जमीन की कमी लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान में बदलाव किए गए हैं। चंडीगढ़ देश का पहला योजनाबद्ध शहर है, जिसकी नींव 1952 में रखी गई थी। 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और यह पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त राजधानी बना।
फेज-II के सेक्टर-43 सब-सिटी सेंटर क्षेत्र में करीब 78 एकड़ खाली जमीन को विकास मार्ग के साथ जोड़ते हुए मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल किया गया है। इसके अलावा कई सेक्टरों में मौजूद खाली प्लॉटों और बिना बिके क्लस्टरों को अब ग्रुप हाउसिंग के लिए विकसित किया जाएगा।
फेज-III में करीब 146 एकड़ खाली जमीन पर 4 से 6 मंजिला हाई-डेंसिटी फ्लैट्स बनाने का प्रस्ताव है। वहीं बाहरी इलाकों और फेज-III में व्यक्तिगत प्लॉटों का आवंटन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को सीमित जमीन में आवास उपलब्ध करवाना है।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को भी विभिन्न सेक्टरों में लगभग 215 एकड़ जमीन दी गई है, जिसे अभी विकसित किया जाना बाकी है। वहीं गांव मलोया के पास 178 एकड़ जमीन पर हाई-राइज रिहायशी इमारतें बनाने की योजना तैयार की जा रही है।


