Thursday, May 14, 2026
Thursday, May 14, 2026

पंजाब की महिला सिख प्रचारक का विरोधियों पर गुस्सा फूटा

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गुरदासपुर–सिख धर्म का प्रचार कर रहीं जालंधर की बीबी दलेर कौर का विरोधियों पर गुस्सा फूटा है। गुरदासपुर में दीवान (धार्मिक सभा) के दौरान सरेआम उनका विरोध किया गया। इसके बाद धमकी भी दी गई कि वह जहां भी प्रोग्राम करेंगी, उनका विरोध किया जाएगा।

 

इसके बाद बीबी दलेर कौर ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर कहा कि मेरी 3 साल की बच्ची है। 24 घंटे में सिर्फ 5 मिनट उसे देखती हूं। बाकी जिंदगी सिख धर्म के प्रचार-प्रसार पर लगा दी। फिर भी मेरे साथ ऐसा किया जा रहा है।

 

दलेर कौर ने कहा- हर चीज बर्दाश्त करने की भी एक लिमिट होती है। गुंडे इकट्‌ठे किए थे। अब वह न तो स्टेज पर आएंगी और न ही धर्म प्रचार करेंगी। इस घटना से उनके मन को बहुत दुख पहुंचा है।

 

बीबी दलेर कौर मूल रूप से जालंधर के नकोदर की रहने वाली हैं। वह ढाडी वार के जरिए सिख धर्म का प्रचार करती हैं। वह सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती हैं, जहां उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। विरोध का यह मामला 22 दिसंबर का है।

 

अब उनके रिएक्शन के बाद यह घटना सुर्खियों में आ गई है। तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बीबी दलेर कौर का समर्थन किया है। वहीं निहंग हरजीत सिंह रसूलपुर ने भी इसका विरोध किया है।

 

 

विरोध की घटना को लेकर बीबी दलेर कौर ने क्या कहा…

 

संगत-प्रबंधकों का कोई कसूर नहीं

दलेर कौर ने कहा- हमारा आज बाबा जीवन सिंह जी और चमकौर की गढ़ी के समूचे शहीदों की याद में पंजगराइयां में दीवान था। वहां हमारा जत्था था। गांव पंजगराइयां की संगत का कोई कसूर नहीं है। प्रबंधकों का भी कोई कसूर नहीं है। महाराज साहब की चमकौर की गढ़ी का इतिहास चल रहा था। मैंने गुरू गोबिंद सिंह महाराज का जिक्र किया कि जब वे चमकौर की गढ़ी को छोड़कर गए, महाराज ने नीला घोड़ा समेत सब कुछ भाई संगत सिंह को बख्शा।

 

जो पढ़ा, पुरखों से सुना, वही बताया

दलेर कौर ने कहा- मैं अब भी यही कहूंगी, कि महाराज साहब ने कलगी घोड़ा भाई संगत सिंह जी को बख्शा। चमकौर साहिब भी समागम चल रहे हैं। आज साहिबजादों का शहीदी दिहाड़ा है। मन को इतना ज्यादा दुख लगा, मैं बाबा संगत सिंह जी का जिक्र किया। हमने जो पढ़ा, अपने पुरखों से जो सुना, अभी तक याद है।

संगत से उठकर विरोध किया गया, फिर चले गए

बीबी दलेर कौर ने कहा- संगत से उठकर कहा गया कि भाई संगत सिंह को नहीं बख्शा था, भाई जीवन सिंह को कहो। हम वहां चुप हो गए। सामने दमदमी टकसाल वाले ज्ञानी तेजबीर सिंह बैठे थे। उन्होंने कहा कि आपने जहां से इतिहास छोड़ा, वहीं से शुरू करो, किसी ने कुछ नहीं कहना। ये लोग संगत से उठकर चले गए कि बाबा जीवन सिंह क्यों नहीं कहा।

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