मध्य प्रदेश में जहरीला कफ सिरप पीने से 26 मासूमों की जान चली गई। पहले उनकी किडनी फेल हुई, इसके बाद शरीर के बाकी अंगों ने भी काम करना बंद कर दिया। आखिर में उनके ब्रेन पर इसका असर हुआ और बच्चों ने दम तोड़ दिया। कफ सिरप की कीमत 89 रुपए थी और इसे पर्चे में लिखने के बदले डॉ. प्रवीण सोनी को 10 फीसदी कमीशन यानी 8 रुपए 90 पैसे मिलते थे।
जितने बच्चों के लिए दवा लिखी, उनसे डॉ. प्रवीण सोनी को करीब 230 रुपए मिले थे। बच्चों की बिगड़ी हालत में उनके माता-पिता बार-बार डॉ. सोनी के पास पहुंचे और वो उन्हें कोल्ड्रिफ पिलाने की सलाह देते रहे। केवल डॉ. प्रवीण सोनी ही नहीं, इस मामले में सिस्टम में बैठे जिम्मेदार भी आंखें मूंदे रहे।
4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था, “हर कसूरवार पर सख्त कार्रवाई होगी।” आज 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार को कोई ठोस कसूरवार नहीं मिल रहा है। सरकार ने जिम्मेदारी के नाम पर तीन सरकारी बाबुओं का निलंबन और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया गया है। अब ऐसी कौन सी जांच है, जो यह बताएगी कि इन मासूमों के असली हत्यारे कौन हैं?
भास्कर ने विशेषज्ञों से बात करके इस पूरे तंत्र को समझने की कोशिश की कि आखिर इस जहरीली दवा के बनने से लेकर बच्चों तक पहुंचने तक हमारे सिस्टम के कौन-कौन से किरदार इस गुनाह में बराबर के साझेदार रहे हैं। पढ़िए, रिपोर्ट…


