पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की अधिसूचना, जिसमें 76 वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा दिया गया, इसने कानूनी समुदाय में तीव्र विवाद खड़ा कर दिया है. इस बीच राज्य के बार काउंसिल ने सिलेक्शन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि बार एसोसिएशन ने इसे एक “मील का पत्थर” करार दिया है.
पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने गुरुवार को हाईकोर्ट की 20 अक्टूबर की अधिसूचना में “भाई-भतीजावाद और पक्षपात” की शिकायतों के बाद आपात बैठक बुलाई. काउंसिल ने हाईकोर्ट से चयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी मांगी है.
इसके एक दिन बाद, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस शील नागू को पत्र लिखकर “दीर्घकालिक प्रतीक्षित” निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया और इसे न्यायालय की “प्रतिभा, योग्यता और पेशेवर उत्कृष्टता को मान्यता देने” की प्रतिबद्धता बताया.
ये विरोधाभासी रुख इस सिलेक्शन प्रक्रिया को विवादास्पद बना देता है, खासकर तब जब एक ही अधिसूचना में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाया गया.
2024 में 210 आवेदकों में से हाईकोर्ट ने 76 वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा दिया, जिनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं.


