होशियारपुर में प्रतिबंधित कीटनाशक ज़ब्त, एफ.आई.आर. दर्ज: गुरमीत सिंह खुड्डियाँ

 

चंडीगढ़, 4 अप्रैलः

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार गैर-मानक और गैर-कानूनी कृषि संबंधी वस्तुओं के खिलाफ छेड़ी गई विशेष मुहिम के अंतर्गत पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने होशियारपुर जिले में दो फर्मों पर छापेमारी कर प्रतिबंधित कीटनाशकों और एक्सपायरी स्टॉक को ज़ब्त किया है।

इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए पंजाब के कृषि और किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियाँ ने बताया कि संयुक्त निदेशक (विस्तार एवं प्रशिक्षण) दिलबाग सिंह की निगरानी में एक विशेष टीम ने मैसर्स जनक राज नरेंद्र कुमार, नई अनाज मंडी, होशियारपुर में अचानक छापा मारा। जांच के दौरान टीम को आईप्रोकैम एग्री केयर, पंचकूला, हरियाणा द्वारा निर्मित और बाजार में बेचे जा रहे प्रतिबंधित अमोनियम सॉल्ट – ग्लायफोसेट 71 प्रतिशत एस.जी. के 99 पैकेट (प्रत्येक 100 ग्राम) बरामद किये गये हैं।

कृषि मंत्री ने आगे बताया कि छापे के दौरान बड़ी मात्रा में एक्सपायरी और गैर-मानक कीटनाशक भी बरामद किए गए, जिनमें शामिल हैं जिनमें 20 पैकेट पेंडीमेथालिन (1 लीटर), 10 पैकेट प्रोफेनोफोस  + साईपरमेथरिन (1 लीटर), 40 पैकेट थायमेथोक्सम (250 ग्राम), 5 पैकेट कार्बेन्डाजिम (250 ग्राम), 75 पैकेट क्लोडिनाफॉप प्रोपारगिल (160 ग्राम), 23 पैकेट एट्राजीन (500 ग्राम), 5 पैकेट मैटालेक्सिल + मैंकोजेब (250 ग्राम) और 10 पैकेट मैंकोजेब (1 लीटर) शामिल हैं।

स खुड्डियाँ ने बताया कि जांच के दौरान नमूने लिए गए और कीटनाशक एक्ट, 1968 तथा नियम, 1971 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत थाना मॉडल टाउन, होशियारपुर में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है।

स. गुरमीत सिंह खुड्डियाँ ने बताया कि एक अन्य कार्रवाई में टीम द्वारा इसी बाजार में मैसर्स विज ट्रेडर्स का भी निरीक्षण किया गया, जहाँ उन्होंने कीटनाशकों, खादों और बीजों के दो-दो नमूने लिए गए। कृषि मंत्री ने बताया कि कीटनाशकों और बीजों की बिक्री तुरंत बंद कर दी गयी है क्योंकि यह फर्म संबंधित एक्टों के तहत उचित लाइसेंस एन्डोर्समेंट के बिना काम कर रही थी।

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे केवल अधिकृत डीलरों से ही कृषि उत्पाद खरीदें और खरीदी गई वस्तुओं का बिल अवश्य लें।

प्रशासनिक सचिव (कृषि) डॉ. बसंत गर्ग ने बताया कि राज्य के सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कृषि लागत संबंधी डीलरों/निर्माताओं/मार्केटिंग कंपनियों पर नियमित निगरानी रखें, ताकि किसानों के लिये गुणवत्ता युक्त उत्पाद यकीनी बनाये जा सकें।

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