चंडीगढ़: पंजाब के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) और छठे वेतन आयोग के एरियर से जुड़े मामले में गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले पर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई थीं।
बुधवार को हाईकोर्ट की छुट्टियों के बाद पहले दिन यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन देर शाम तक सुनवाई चलने के कारण सरकार की ओर से ही अपना पक्ष रखा जा सका। अब अगली सुनवाई में अदालत सरकार से यह जानना चाहेगी कि बकाया डीए के भुगतान को लेकर उसका क्या रोडमैप है।
इससे पहले 8 अप्रैल को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित महंगाई भत्ता जारी करने का आदेश दिया था। सरकार ने इस फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी। हालांकि डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार से भुगतान की योजना सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा था।
अब अदालत इस बात पर विचार करेगी कि सरकार एकमुश्त भुगतान करेगी, किस्तों में राशि जारी करेगी या फिर वित्तीय स्थिति का हवाला देकर अतिरिक्त समय मांगेगी।
फिलहाल पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत डीए अभी भी लंबित है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई बोनस नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन का अभिन्न हिस्सा है।
उधर, कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं हुआ तो 17 जुलाई को राज्यभर में महारैली और महाबंद का आयोजन किया जा सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि पेंशनरों और उनके परिवारों को मिलाकर यह मुद्दा करीब 40 लाख लोगों से जुड़ा है, जिसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।


