Bihar Panchami 2025: वृंदावन में आज से श्री बांके बिहारी जी का जन्मोत्सव यानी बिहार पंचमी Bihar Panchami महोत्सव आरंभ हो गया है, जिसे भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। यह त्योहार मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
बिहार पंचमी इतिहास और पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विक्रम संवत 1562 के इस दिन वृंदावन के निधिवन में स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति से बांके बिहारी (राधा-कृष्ण का संयुक्त रूप) का प्राकट्य हुआ था। यह प्राकट्य तिथि भक्तों के लिए अति पवित्र मानी जाती है और उसी को आज का जन्मोत्सव रूप दिया गया है।
बिहार पंचमी उत्सव की परंपरा और आयोजन
इस दिन को ‘बिहार पंचमी’ महोत्सव के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह बांके बिहारी जी का प्राकट्य दिवस है। भक्त सुबह-सुबह मंदिर में एक विशेष रथ यात्रा करते हैं। निधिवन से सुंदर चांदी के रथ में बांके बिहारी को मंदिर तक लाया जाता है। इस दिन पूरा वृंदावन ब्रज प्रेम और भक्ति के रस में डूब जाता है, गली-गली में भजन-कीर्तन, आरती और भोग की तैयारियां होती हैं।
बिहार पंचमी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
बांके बिहारी राधा कृष्ण की अनन्य लीलाओं का प्रतीक हैं और उनका यह रूप भक्तों के प्रेम और लगाव का केंद्र है।


