Wednesday, May 13, 2026
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भागवत बोले- भारत में कोई अहिंदू नहीं:मुसलमानों-ईसाइयों के पूर्वज हिंदू,

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत की आत्मा हिंदू संस्कृति है। संघ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज की सेवा और संगठन के लिए काम करता है।

भागवत ने यह बात बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम ‘100 साल का संघ: नए क्षितिज’ में कही। इस मौके पर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और कई सामाजिक हस्तियां मौजूद थीं। इस दौरान भागवत ने कहा-

भारत में सभी हिंदू है। यहां के सभी मुसलमान और ईसाई भी उन्हीं पूर्वजों के वंशज हैं। शायद वे भूल गए हैं या उन्हें भुला दिया गया है। भारत में कोई अहिंदू नहीं है।

भागवत ने कहा, “संघ सत्ता या प्रमुखता नहीं चाहता। संघ का उद्देश्य सिर्फ एक है कि समाज को संगठित कर भारत माता की महिमा बढ़ाना। पहले लोग इस बात पर विश्वास नहीं करते थे, लेकिन अब करते हैं।”

मोहन भागवत की 5 बड़ी बातें…

  1. भारत को ब्रिटिशों ने नहीं बनाया, यह प्राचीन राष्ट्र है- हमारा राष्ट्र ब्रिटिशों की देन नहीं है। हम सदियों से एक राष्ट्र हैं। दुनिया के हर देश की एक मूल संस्कृति होती है। भारत की मूल संस्कृति क्या है? कोई भी परिभाषा दें, वह आखिर में ‘हिंदू’ शब्द पर ही पहुंचती है।

 

  1. हिंदू होना मतलब भारत के प्रति जिम्मेदारी लेना- भारत में कोई ‘अहिंदू’ नहीं है। हर व्यक्ति चाहे जाने या न जाने, भारतीय संस्कृति का पालन करता है। इसलिए हर हिंदू को यह समझना चाहिए कि हिंदू होना मतलब भारत के प्रति जिम्मेदारी लेना है।”

 

  1. भारत एक हिंदू राष्ट्र होना संविधान के खिलाफ नहीं- भारत का हिंदू राष्ट्र होना किसी बात के विरोध में नहीं है। यह हमारे संविधान के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके अनुरूप है। संघ का लक्ष्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।

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