Friday, June 12, 2026
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श्री अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए गए: स्पेशल डीजीपी अर्पित शुक्ला

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चंडीगढ़/पठानकोट, 25 जून:

श्री अमरनाथ यात्रा 2025 को सुरक्षित और सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस द्वारा व्यापक, बहुस्तरीय और अंतर-एजेंसी सुरक्षा एवं समन्वय योजना लागू की गई है, जिसमें श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु उन्नत निगरानी, बलों की रणनीतिक तैनाती और 24 घंटे समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यह जानकारी आज स्पेशल डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) श्री अर्पित शुक्ला ने दी।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से प्रारंभ होकर 9 अगस्त 2025 तक चलेगी। इस वार्षिक यात्रा में देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं, जिनमें से कई श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र गुफा जाने के लिए विशेष रूप से पंजाब के पठानकोट जिले से होकर गुजरते हैं।

स्पेशल डीजीपी ने वार्षिक तीर्थ यात्रा हेतु सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा और पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, सेना, सिविल प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय सुरक्षा एवं समन्वय बैठक की अध्यक्षता की।

पठानकोट में आयोजित इस बैठक के दौरान अमरनाथ यात्रा से जुड़े रणनीतिक प्रबंधों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें पुलिस बलों की तैनाती, सुरक्षा प्रबंध, यातायात व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्पेशल डीजीपी अर्पित शुक्ला ने कहा कि पठानकोट की रणनीतिक स्थिति, जो पाकिस्तान के साथ 26.385 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है और जहां महत्वपूर्ण रक्षा इकाइयां स्थित हैं, को देखते हुए सुरक्षा में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा को और मजबूत करते हुए जम्मू एवं कश्मीर की ओर जाने वाली सभी सड़कों की जिम्मेदारी कमांडेंट स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है।

उन्होंने बताया कि कमांडेंट रैंक के अधिकारियों की निगरानी में यात्रा मार्ग को सुरक्षा क्षेत्रों में विभाजित किया गया है ताकि 24 घंटे जमीनी स्तर पर निगरानी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आगे बताया कि नाका माधोपुर में 24 घंटे संचालित कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है, जिसकी निगरानी एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जा रही है, जो उन्नत निगरानी प्रणालियों के माध्यम से सभी वाहनों और श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

स्पेशल डीजीपी ने बताया कि संभावित खतरों की पहचान और उन्हें समय रहते रोकने के लिए रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, लंगर स्थलों, धार्मिक स्थलों और पूरे यात्रा मार्ग सहित संवेदनशील स्थानों पर प्रतिदिन एंटी-सबोटाज और सुरक्षा जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पठानकोट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दलजिंदर सिंह ढिल्लों की निगरानी में सुरक्षा प्रबंध लागू किए जा रहे हैं।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), जम्मू एवं कश्मीर पुलिस, हिमाचल प्रदेश पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मजबूत समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने बताया कि संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए मोबाइल निगरानी यूनिट, हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन आधारित हवाई निगरानी, जीपीएस समर्थित गश्त और रियल-टाइम रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे अतिरिक्त तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस द्वारा यात्रा मार्ग के पेट्रोल पंप, ढाबा, होटल, गेस्ट हाउस और सड़क किनारे स्थित अन्य प्रतिष्ठानों के मालिकों एवं स्टाफ को विशेष जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे किसी भी असामान्य गतिविधि, संदिग्ध वस्तु या अज्ञात व्यक्ति की सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन को दे सकें।

इस बैठक में डीआईजी बॉर्डर रेंज सतिंदर सिंह, एआईजी सुखमिंदर सिंह मान, डिप्टी कमिश्नर पठानकोट आदित्य उप्पल, डिप्टी कमिश्नर होशियारपुर आशिका जैन, डिप्टी कमिश्नर कठुआ डॉ. राकेश मिन्हास, एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लों, एसएसपी होशियारपुर संदीप कुमार मलिक, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी, तथा पड़ोसी राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पुलिस एवं सिविल अधिकारी भी उपस्थित थे।

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