शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत रत्न दिलाने का मुद्दा पंजाब विधानसभा के बाद अब कांग्रेस के लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने संसद में उठाया है। उन्होंने कहा कि कई लोगों को घर बैठे भारत रत्न दिया गया, जबकि देश की आजादी और एकता को कायम रखने वाले भगत सिंह को नहीं दिया। आज 95 साल बाद भी ऐसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। राजा वड़िंग ने बताया कि पांच साल पहले उन्हें त्रिपुरा जाने का मौका मिला था। एयरपोर्ट पर उतरे तो एक स्टेडियम पर उनकी नजर पड़ी, जिस पर ‘शहीद भगत सिंह स्टेडियम त्रिपुरा’ लिखा हुआ था। भगत सिंह पंजाब में पैदा हुए, त्रिपुरा में उनका नाम देखकर उनके मन में गौरव और गर्व का भाव पैदा हुआ। देश की आजादी और एकता के लिए उन्होंने बलिदान दिया है।
वड़िंग ने कहा कि, 23 मार्च 1931 की शाम की बात है, जब वह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे। अफसर ने दरवाजा खोला और बोला, “आपको फांसी देने का फरमान आ गया है।” इस पर भगत सिंह ने कहा, “दो मिनट रुक जाएं, इस समय एक क्रांतिकारी की दूसरे क्रांतिकारी से मुलाकात हो रही है।” हालांकि 95 साल के बाद भी उन्हें भारत रत्न नहीं दिया गया।