पंजाब के 7 जिले, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का, कपूरथला का सुल्तानपुर लोधी और होशियारपुर बाढ़ की चपेट में हैं। यहां के 250 से ज्यादा गांवों में 5 से 15 फीट तक पानी भरा हुआ है। पठानकोट में रावी के पानी से बचने के लिए लोग खुद बांध बनाने में जुटे हैं।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों ने घरों की छत पर सामान समेत डेरा जमा रखा है। इसे देखते हुए आर्मी लगातार उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू कर रही है। अमृतसर के अजनाला में आर्मी जवानों ने छत से लोगों को रेस्क्यू किया। लोगों को बाहर निकालने से लेकर उन्हें ड्रोन से राशन पहुंचाया जा रहा है।
बाढ़ के पानी में अमृतसर में बुड्ढा साहिब गुरुद्वारा डूब गया। हुसैनीवाला बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी वाले स्थान पर भी 5 फीट तक पानी भर गया है।
लोगों की मदद के लिए पंजाब कांग्रेस के सभी विधायकों के अपनी एक-एक माह की सैलरी सीएम रिलीफ फंड में देने का ऐलान किया है। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पत्र जानकारी कर जानकारी साझा की है।
वहीं शुक्रवार सुबह चंडीगढ़ स्थित सुखना लेक के फ्लड गेट भी खोल दिए गए हैं, जिससे घग्गर का जलस्तर बढ़ गया है। इससे मोहाली के डेराबस्सी, पटियाला और संगरूर में बाढ़ आ सकती है।
वहीं, भाखड़ा के भी चार गेटों से सतलुज में पानी छोड़ा जा रहा है। सतलुज नदी का पानी ओवरफ्लो हुआ तो रोपड़, नवांशहर, जालंधर, लुधियाना, फिरोजपुर, तरनतारन, फाजिल्का में बाढ़ का संकट हो सकता है। इन जगहों पर सतलुज सीधे या उससे नहरें निकलकर जाती हैं।
सतलुज नदी में बढ़ रहे पानी से आने वाली संभावित बाढ़ से बचने के लिए जालंधर के गांवों में मॉक ड्रिल करवाई गई। जालंधर के डीसी डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि सर्किट हाउस में स्टेट लेवल फ्लड कंट्रोल रूम बनाया गया है।