लुधियाना, 5 अप्रैल — लुधियाना में पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग लुधियाना में भारत भूषण आशु से मिलने उनके घर पहुंचे। लेकिन जैसे ही आशु को इस बात की भनक लगी, वह अपनी पत्नी के साथ घर से निकल गए।
लुधियाना की राजनीति में यह एक नाटकीय घटना मानी जा रही है, जो उपचुनाव से पहले कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, राजा वड़िंग के साथ जिला अध्यक्ष और पूर्व विधायक संजय तलवार तथा वरिष्ठ नेता कैप्टन संदीप संधू भी आशु के घर पहुंचे, लेकिन जो हुआ, वह चौंकाने वाला था। जैसे ही आशु को पता चला कि वड़िंग और अन्य नेता उनके घर की ओर आ रहे हैं, उन्होंने पीछे के दरवाजे से अपनी पत्नी के साथ घर छोड़ दिया।
ऐसा माना जा रहा है कि आशु ने जानबूझकर इस मुलाकात से बचना चाहा क्योंकि वे राजा वड़िंग और उनके गुट से मिलना नहीं चाहते थे। कुछ समय बाद, जब कांग्रेस नेता वहां से चले गए, तो आशु और उनकी पत्नी दोबारा घर में नजर आए।
पुरानी नाराजगी, नई तकरार
यह घटना अचानक नहीं घटी। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आशु काफी समय से राजा वड़िंग से नाराज़ चल रहे हैं। वजह यह है कि वड़िंग ने लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था, जबकि आशु खुद को इस सीट का मज़बूत दावेदार मानते थे। यह फैसला आशु के लिए न सिर्फ राजनीतिक झटका था, बल्कि उन्हें लगा कि पार्टी में उनकी अहमियत को भी कम किया जा रहा है।
पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके आशु फिलहाल लुधियाना विधानसभा सीट से घोषित उम्मीदवार हैं, लेकिन हाल की घटनाओं और पार्टी के अंदर चल रही खींचतान के चलते उनकी उम्मीदवारी पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
लुधियाना सीट पर संकट
राष्ट्रीय स्तर पर पहले ही संघर्ष कर रही कांग्रेस पार्टी अब पंजाब में भी अंदरूनी विवादों के चलते संकट में दिख रही है। लुधियाना जैसे शहरी क्षेत्र, जिसे कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, अब आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। AAP पहले ही शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। यदि आशु इसी तरह नाराज रहते हैं या चुनावी मुहिम से दूरी बनाए रखते हैं, तो इसका सीधा फायदा AAP को मिल सकता है।
अब आगे क्या?
राजा वड़िंग ने सार्वजनिक रूप से एकता और तालमेल की बात कही है, लेकिन आज की घटना यह दिखाती है कि आशु के साथ उनके रिश्ते बेहद नाज़ुक मोड़ पर हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि शीर्ष नेतृत्व को नेताओं की नाराजगी की जानकारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। जिस तरह से आशु ने इस बैठक से किनारा किया, यह कांग्रेस हाईकमान को एक स्पष्ट संदेश है कि लुधियाना उपचुनाव में पार्टी की स्थिति गंभीर है।
यदि यह अंदरूनी कलह जल्द नहीं सुलझाई गई, तो लुधियाना सीट कांग्रेस के लिए एक और बड़ी हार की वजह बन सकती है।