चंडीगढ़ (आफिस ब्यूरो)- पंजाब विधानसभा में विपक्ष की भूमिका हमेशा से लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रही है। लोकतंत्र की स्वस्थ प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ होती हैं। जहां सरकार प्रदेश की प्रगति और जनता की भलाई के लिए नीतियाँ बनाती है, वहीं विपक्ष का कर्तव्य होता है कि वह सरकार को जवाबदेह बनाए और उसकी नीतियों की समीक्षा करे। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर पंजाब का मुख्य विपक्ष विधानसभा में सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस मुद्दा उठाने में असफल क्यों रहा है?
इस असफलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहला कारण यह है कि पंजाब सरकार ने अपने शासन के दौरान कुछ ऐसे कार्य किए हैं, जो आम जनता के लिए लाभकारी साबित हुए हैं। सरकार की विभिन्न योजनाएँ, जैसे मुफ्त शिक्षा सेवाएँ, किसानों के लिए सुविधाएँ और आर्थिक स्थिरता के लिए उठाए गए कदम, जनता के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। यही कारण है कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ आलोचना करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं मिल रहा है।
दूसरा कारण विपक्ष की अपनी आंतरिक कमजोरी है। जब भी किसी सरकार के खिलाफ विपक्ष प्रभावी साबित होता है, तो यह उसकी संगठित शक्ति पर निर्भर करता है। लेकिन आज पंजाब का विपक्ष खुद ही आपसी गुटबाज़ी और असहमति का शिकार है। कई बार विपक्षी नेता आपसी विवादों में उलझ जाते हैं, जिससे उनकी गंभीरता जनता की नज़रों में कम हो जाती है।
तीसरा कारण यह है कि सरकार के खिलाफ उठाए जाने वाले मुद्दे कई बार जनता के बीच विश्वास पैदा नहीं कर पाते। जब विपक्ष केवल विरोध करने के लिए विरोध करता है, लेकिन जनता को यह महसूस होने लगता है कि इन मुद्दों का उनके रोजमर्रा के जीवन से कोई सीधा संबंध नहीं है, तो वे विपक्ष को गंभीरता से नहीं लेते। जनता उन्हीं बातों को महत्व देती है, जो उनके जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं।
चौथा कारण यह है कि सरकार के मजबूत प्रशासनिक कार्यों ने भी विपक्ष को बहुत कम अवसर दिए हैं। सरकार ने अपने वादों को लागू करने में कुछ हद तक सफलता प्राप्त की है, जिससे विपक्ष के हाथ में सरकार की आलोचना करने के लिए कोई बड़ा हथियार नहीं आ रहा। जब कोई सरकार लगातार लोक-हितैषी नीतियाँ लागू करती रहती है, तो विपक्ष के लिए सरकार की आलोचना करना और भी मुश्किल हो जाता है।
पाँचवाँ कारण विपक्ष की नैतिकता और जनता का विश्वास भी है। यदि किसी विपक्षी दल ने अपने पिछले शासनकाल में नकारात्मक राजनीति की है, तो जनता उनकी आलोचना को भी गंभीरता से नहीं लेती। वे समझते हैं कि विपक्ष केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए सरकार की आलोचना कर रहा है।
सिर्फ आलोचना करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विपक्ष को जनता की समस्याओं और सरकार की कमज़ोरियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी आना चाहिए। यदि सरकार कोई गलती करती है, तो उस गलती को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना भी एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन जब विपक्ष यह कार्य करने में असफल रहता है, तो जनता उसे नकारात्मक धारा के रूप में देखने लगती है।
इन सभी तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब का मुख्य विपक्ष विधानसभा में सरकार को घेरने में असफल रहा है। उनके पास न तो कोई ठोस नीति है और न ही उनकी विरोध करने की रणनीति मजबूत है। यदि विपक्ष एक प्रभावी भूमिका निभाना चाहता है, तो उसे अपनी रणनीति को सुदृढ़ करना होगा, जनता के हितों की बात करनी होगी और सरकार की गलतियों को ठोस तरीके से उजागर करना होगा।